जयपुर. कोरोना वायरस (Corona virus) के चलते भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने 31 मार्च तक पूरे भारत में अपने ऑपरेशन को रोक दिया है. उत्तर पश्चिम रेलवे के चारों मंडल के तहत चलने वाली लगभग 390 ट्रेनें पूरी तरह से रुक चुकी हैं. 31 मार्च के बाद हालात का जायजा लेकर यह तय किया जाएगा कि इसे आगे जारी रखा जाए या नहीं. अभी केवल मालगाड़ियों को चलने की अनुमति जारी रखी गई है. इसके साथ ही रेलवे ने टिकट रिफंड (Ticket refund) के लिए कुछ नियमों को आसान किया है ताकि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो

NWR 25 करोड़ रुपयों से ज्यादा के टिकट रिफंड कर चुका है
उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ अभय शर्मा ने बताया कि पिछले पांच दिनों से जयपुर जंक्शन और NWR के चारों मंडल की ट्रेनें दर्जनों की तादाद में पहले ही रद्द हो रही थी. हालांकि इस रद्दीकरण के पीछे यात्रियों का रिजर्वेशन रद्द करवाना था. अकेला NWR जोन ही यात्रियों को 25 करोड़ रुपयों से ज्यादा के टिकट रिफंड कर चुका है. अब भी रिजर्वेशन रद्द करवाने का सिलसिला लगातार जारी है. नए आंकड़े सामने आएंगे तो पता चलेगा कि अब तक कितना रिफंड हो चुका है. रेलवे ने रिजर्वेशन रद्द करवाने के नियमों में भी कुछ बदलाव किया है. कोशिश यह की गई है कि इसके तहत यात्रियों को कम से कम रेलवे स्टेशन जाना पड़े और ऑनलाइन ही उन्हें उनका रिफंड मिल जाए.

रेलवे ने यात्रियों को भीड़-भाड़ वाले स्थानों से बचाने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के उद्देश्य से रिफंड नियमों में छूट प्रदान की है. इसके तहत ई-टिकट के लिए सभी नियम पूर्ववत हैं. यात्री को टिकट के धन वापसी के लिए स्टेशन आने की जरूरत नहीं है. यह छूट आगामी 3 महीने की यात्रा अवधि के लिए दी गई है. यह अवधि 21 मार्च से 21 जून 2020 तक की है. जो यात्री 139 के माध्यम से टिकट रद्द करना चाहते हैं उन्हें यात्रा की तारीख से 3 महीने के भीतर काउंटर पर रिफंड मिल सकता है. यानी यात्रा की तारीख से अगले तीन महीने तक रिजर्वेशन रद्द करवाकर ऑनलाइन अपना रिफंड पा सकते हैं

लॉक डाउन की तिथि आगे भी बढ़ सकती है
31 मार्च तक अगर हालात सामान्य होते है तो ट्रेनों को यथावत शुरू किया जाएगा अन्यथा ये तारीख आगे भी बढ़ाई जा सकती है. सरकार की इस मुहिम में जनता भी पूरा साथ दे रही है और कम से कम घरों से बाहर निकल रही है. रेलवे लॉक डाउन होने से कोरोना का खतरा कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है. क्योंकि रोज करोड़ों लोग रेल के ज़रिए सफर करते हैं. ऐसे में जब कोई सफर ही नहीं करेगा तो इसके फैलने की आशंका भी कम होगी.